Empowering Communities, Building Futures
Strong leadership guiding the organization's mission and vision.
उद्यमिता, सेवा और सामाजिक नेतृत्व की प्रेरक गाथा
श्री प्रदीप ढेडिया उन विशिष्ट व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने अपने जीवन में उद्यमिता, सामाजिक सेवा और मानवीय मूल्यों का अद्भुत समन्वय स्थापित किया है। उनका जीवन केवल व्यावसायिक उपलब्धियों की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, संकल्प, परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण का एक प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने सिद्ध किया है कि यदि व्यक्ति में दूरदृष्टि, कर्मनिष्ठा और सेवा-भाव हो तो साधारण परिस्थितियों से उठकर भी असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले की धरती से निकलकर कोलकाता के सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक परिदृश्य में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले श्री ढेडिया ने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत अत्यंत साधारण स्तर से की। लेटरहेड और विजिटिंग कार्ड की छपाई से प्रारंभ हुआ उनका सफर वर्ष 1982 में आनंद प्रिंटर्स की स्थापना के साथ एक नई दिशा में आगे बढ़ा। अपनी गुणवत्ता, विश्वसनीयता और ग्राहक-केन्द्रित कार्यशैली के बल पर उन्होंने इस संस्थान को प्रिंटिंग उद्योग में एक प्रतिष्ठित पहचान दिलाई। आज आनंद प्रिंटर्स उत्कृष्टता और विश्वास का पर्याय माना जाता है।
दूरदर्शी सोच और नवाचार की भावना से प्रेरित होकर श्री ढेडिया ने इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। आनंद इवेंट्स के माध्यम से उन्होंने इस क्षेत्र की संभावनाओं को समय रहते पहचाना और इसे संगठित एवं पेशेवर स्वरूप प्रदान करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उनकी रचनात्मकता, सूक्ष्म योजना और कुशल प्रबंधन क्षमता ने उन्हें इस क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तित्वों में स्थान दिलाया।
व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ श्री प्रदीप ढेडिया का वास्तविक परिचय उनके सामाजिक सरोकारों और सेवा-भाव से मिलता है। समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति उनकी संवेदनशीलता ने उन्हें सामाजिक कार्यों की ओर प्रेरित किया। इसी उद्देश्य को मूर्त रूप देने के लिए उन्होंने समर्पण ट्रस्ट, कोलकाता की स्थापना एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म और मानव कल्याण के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
उनके नेतृत्व में समर्पण ट्रस्ट ने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, साहित्यिक आयोजनों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा जनकल्याणकारी गतिविधियों का सफल आयोजन किया है। संस्था द्वारा किए गए सेवा कार्यों ने समाज के अनेक वर्गों को लाभान्वित किया है और सामाजिक चेतना को नई दिशा प्रदान की है। श्री ढेडिया का मानना है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रतिभाओं का सम्मान और प्रोत्साहन अत्यंत आवश्यक है। इसी सोच के तहत उन्होंने साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, समाजसेवा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने की परंपरा को भी प्रोत्साहित किया है।
श्री ढेडिया की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी सहज आत्मीयता, संगठन क्षमता और लोगों को जोड़ने की अद्भुत कला शामिल है। वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के लोगों को एक सूत्र में पिरोकर सामूहिक हित के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित करते हैं। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता, संवेदनशीलता और नेतृत्व का ऐसा संतुलन दिखाई देता है जो उन्हें समाज में विशेष सम्मान दिलाता है।
श्री प्रदीप ढेडिया का जीवन इस सत्य का सशक्त प्रमाण है कि वास्तविक सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में निहित होती है। उद्यमिता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे ऐसे कर्मयोगी हैं जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि जब सफलता का हाथ सेवा से जुड़ता है, तब समाज में स्थायी और सार्थक परिवर्तन संभव होता है।
श्री प्रदीप ढेडिया आज एक सफल उद्यमी, संवेदनशील समाजसेवी, कुशल संगठनकर्ता और प्रेरक नेतृत्वकर्ता के रूप में समाज में सम्मानित स्थान रखते हैं। उनका जीवन सेवा, समर्पण और सृजनशीलता की ऐसी मिसाल है जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
एक प्रेरक व्यक्तित्व
श्री निरंजन कुमार अग्रवाल देश के प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट, समाजसेवी, सांस्कृतिक संरक्षक एवं प्रख्यात उद्योग-जगत से जुड़े हुए व्यक्तित्व हैं। वर्ष 1983 से फेलो चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपनी उत्कृष्ट व्यावसायिक सेवाएँ प्रदान करते हुए उन्होंने वित्त, कराधान, लेखा एवं कॉर्पोरेट प्रशासन के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। वे निरंजन कुमार एंड कंपनी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के संस्थापक एवं प्रोप्राइटर हैं।
व्यावसायिक उत्कृष्टता के साथ-साथ श्री अग्रवाल सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति भी सदैव समर्पित रहे हैं। भारतीय ओवरसीज बैंक के पूर्व निदेशक के रूप में उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विभिन्न प्रतिष्ठित व्यावसायिक एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहते हुए उन्होंने व्यापार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समाजसेवा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
वे मारवाड़ी संस्कृति मंच, कोलकाता के संस्थापक अध्यक्ष हैं तथा लोक संस्कृति, साल्ट लेक, मारवाड़ी रिलीफ सोसायटी, पूर्वांचल नागरिक समिति, अखिल भारतीय मारवाड़ी महासंघ, इंटरनेशनल मारवाड़ी फेडरेशन जैसी अनेक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। शिक्षा एवं संस्कारों के प्रसार हेतु वे चमेली देवी सरस्वती विद्या मंदिर के ट्रस्टी के रूप में भी अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।
समर्पण, कोलकाता के ट्रस्टी के रूप में श्री निरंजन कुमार अग्रवाल का मार्गदर्शन संस्था के लिए अत्यंत प्रेरणास्पद एवं मूल्यवान है। समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक चेतना तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन के लिए उनका सतत प्रयास संस्था की गतिविधियों को नई ऊर्जा एवं दिशा प्रदान करता है।
अपने सौम्य व्यक्तित्व, दूरदर्शी चिंतन, संगठनात्मक क्षमता तथा सेवा-भाव के कारण श्री अग्रवाल समाज में सम्मानित स्थान रखते हैं। वे उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने व्यावसायिक सफलता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए सेवा, संस्कार और समर्पण का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
Trustee
Sri Narayan Prasad Dalmia is a trustee who brings valuable expertise and vision to Samarpan Trust's leadership team. His involvement in the trust demonstrates a strong dedication to preserving Hindi language as an integral part of Indian cultural identity. He contributes to the organization's efforts in conducting seminars, workshops, and educational programs that connect communities with their linguistic and cultural heritage.
Trustee
Sri Ashok Kumar Goenka is a trustee whose commitment to the Samarpan Trust reflects his belief in the importance of preserving Hindi language and Indian cultural traditions. His participation in the trust's activities and governance helps ensure that the organization continues to fulfill its mission of promoting linguistic and cultural heritage. He actively engages in initiatives that foster pride and appreciation for our rich cultural identity.
पत्रकारिता, साहित्य और जनसंचार के सेतु-निर्माता
भारतीय पत्रकारिता और जनसंचार जगत में डॉ. जयप्रकाश मिश्र एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिन्होंने पत्रकारिता की व्यावहारिक दुनिया, अकादमिक चिंतन और प्रशासनिक दायित्वों के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण किया है। वे न केवल एक संवेदनशील पत्रकार, गंभीर अध्येता और कुशल संपादक हैं, बल्कि हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति समर्पित चिंतक भी हैं। उनके व्यक्तित्व में विद्वता, सृजनशीलता, सामाजिक प्रतिबद्धता और प्रशासनिक दक्षता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।
वर्तमान में डॉ. मिश्र सूचना एवं संस्कृति विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार में प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं तथा पश्चिम बंगाल सरकार की हिंदी मासिक पत्रिका ‘पश्चिम बंगाल’ के संपादक हैं। उनके कुशल संपादन, व्यापक दृष्टि और भाषाई संवेदनशीलता के कारण यह पत्रिका हिंदी जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। जनसंचार के क्षेत्र में उनकी सक्रियता और योगदान केवल संपादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हिंदी पत्रकारिता के समकालीन विमर्श को नई दिशा प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं।
डॉ. मिश्र की शैक्षणिक यात्रा अत्यंत समृद्ध और बहुआयामी रही है। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय, रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, बर्द्धमान विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय तथा विश्वप्रसिद्ध स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS), लंदन विश्वविद्यालय से अध्ययन किया है। SOAS, लंदन विश्वविद्यालय में विजिटिंग स्कॉलर के रूप में उनका चयन उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बौद्धिक पहचान का प्रमाण है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका अनुभव दो दशकों से अधिक समय तक फैला हुआ है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान, नई दुनिया, सन्मार्ग, सलाम दुनिया सहित अनेक दैनिक, पाक्षिक और मासिक प्रकाशनों में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। रिपोर्टर, विशेष संवाददाता, उप-संपादक, राज्य ब्यूरो समन्वयक तथा सेंट्रल डेस्क को-ऑर्डिनेटर जैसे विविध पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने पत्रकारिता के प्रत्येक आयाम को निकटता से समझा और उसे समृद्ध किया। उनकी लेखनी में तथ्यपरकता, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों का संतुलित समावेश दिखाई देता है।
पत्रकारिता के साथ-साथ डॉ. मिश्र ने शिक्षण और शोध के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कोलकाता महानगर के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया तथा प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शोधार्थी के रूप में अकादमिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाई। उनके शोधपरक लेख, समीक्षाएँ और पत्रकारिता संबंधी आलेख देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं तथा शोध जर्नलों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में उनकी सक्रिय भागीदारी उन्हें एक गंभीर विचारक और संवादधर्मी विद्वान के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों द्वारा आयोजित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने शोधपत्र एवं विचार प्रस्तुत किए हैं, जिन्हें व्यापक सराहना प्राप्त हुई है।
साहित्य, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में भी डॉ. मिश्र का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे समर्पण ट्रस्ट, कोलकाता के सलाहकार के रूप में संस्था को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। उनके नेतृत्व और प्रेरणा से ट्रस्ट द्वारा हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ, अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह, निःशुल्क अनुवाद प्रशिक्षण कार्यशालाएँ, हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया है। इन आयोजनों ने भाषा, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में सार्थक विमर्श को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. जयप्रकाश मिश्र का व्यक्तित्व इस बात का सशक्त उदाहरण है कि पत्रकारिता केवल समाचारों का संप्रेषण नहीं, बल्कि समाज की चेतना को जागृत करने और संवाद की संस्कृति को समृद्ध बनाने का माध्यम भी है।