कार्यक्रम एवं सामुदायिक पहल
हमारे द्वारा सफलतापूर्वक आयोजित किए गए कार्यक्रम
2010
सॉल्ट लेक स्टेडियम हेलिपैड ग्राउंड
समर्पण ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2010 में आयोजित फूलों की होली का अनुपम आयोजन आज भी स्मृतियों में सजीव है।
2017
सफायर बैंक्वेट
सन 2017 में कोलकाता स्थिति सफायर बैंक्वेट में आयोजित सनातनी मेल मिलाप कार्यक्रम गरिमामयी एवं प्रेरणादायी आयोजन रहा।
2017
सीताराम सत्संग समिति
सीताराम सत्संग समिति द्वारा आयोजित सुंदरकांड पाठ का यह पावन अवसर भक्ति भाव और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा।
31 मार्च 2018
बीएफ पार्क, साल्ट लेक सिटी
पुनरासिर बालाजी बाबा ज्योत का यह पावन अवसर भक्ति भाव और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा।
2020
कोलकाता
कोविड-19 महामारी के दौरान, समर्पण ट्रस्ट ने कोलकाता में जरूरतमंदों के लिए खाद्य वितरण अभियान चलाया, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिली।
5th June 2021
ज़ूम ऑनलाइन सत्र
आज का जीवन भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और निरंतर दबाव से भरा हुआ है। सफलता की अंधी दौड़ में मनुष्य बाहरी उपलब्धियाँ तो अर्जित कर रहा है, लेकिन भीतर से तनाव, चिंता और मानसिक थकान का शिकार होता जा रहा है।
6 जून 2021
कोन्नगर
मई, 2021 में आए भीषण प्राकृतिक चक्रवात ‘यास’ ने पश्चिम बंगाल में व्यापक तबाही मचाई थी। लाखों लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। अनेक परिवार बेघर हो गए, भोजन और शुद्ध पेयजल का संकट गहरा गया तथा दवाओं की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बन गई थी।
12 जून 2021
ज़ूम ऑनलाइन सत्र
आज के समय में केवल संपत्ति अर्जित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सुव्यवस्थित और विवाद रहित हस्तांतरण भी उतना ही आवश्यक हो गया है। परिवार, व्यवसाय और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तराधिकार योजना (Succession Planning) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।
14 जून 2021
ज़ूम ऑनलाइन सत्र
कोरोना महामारी के कठिन दौर में जहाँ एक ओर भय, तनाव और असहायता का वातावरण था, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की आवश्यकता भी तेजी से महसूस की जा रही थी। ऐसे समय में समर्पण ट्रस्ट द्वारा 14 जून, 2021 को आयोजित ऑनलाइन स्वास्थ्य सत्र “सुझोक थेरेपी से कोरोना एवं अन्य व्याधियों से बचाव” लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी और मार्गदर्शक सिद्ध हुआ।
20 जून 2021
नामखाना
मई 2021 में आए भीषण चक्रवात ‘यास’ ने पश्चिम बंगाल, विशेषकर तटीय क्षेत्रों में अभूतपूर्व तबाही मचाई थी। लाखों लोगों का जीवन संकटग्रस्त हो गया, अनेक परिवारों के आशियाने उजड़ गए तथा भोजन, शुद्ध पेयजल और आवश्यक दवाओं का गहरा संकट उत्पन्न हो गया। चारों ओर भय, असुरक्षा और असहायता का वातावरण व्याप्त था।
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